होम/धार्मिक संग्रह/महाशिवरात्रि व्रत विधि

महाशिवरात्रि का व्रत सभी वर्णों के स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, वृद्ध के लिए मान्य है। अत: आवश्यक नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति मंत्रों और पूजा विधि का ज्ञान रखता हो। अपने भक्ति भाव और श्रद्धा के अनुसार शिव पूजन कर सकते हैं। धन का सार्मथ्य हो, तो किसी ब्राह्मण से विधि-विधान से पूजन कराएं। रुद्राभिषेक, रुदी पाठ, पंचाक्षर मंत्र का जाप आदि कराएं। समर्थजनों को यह व्रत प्रातः काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त तक करना चाहिए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए।जो लोक इस विधि से व्रत करने में असमर्थ हों वे रात्रि के आरंभ में तथा अर्द्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। यदि इस विधि से भी व्रत करने में असमर्थ हों तो पूरे दिन व्रत करके सांयकाल में भगवान शंकर की यथाशक्ति पूजा अर्चना करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। व्रत के पूर्ण हो जाने के पश्चात ग्रहण करने वाले व्यंजनों में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं और लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करते हैं। व्रत में यदि कुछ नमकीन खाने की इच्छा हो तो आप सिंघाड़े या कूटू के आटे के पकौड़े बना सकते हैं। इस व्रत में आप आलू सिंघाड़ा, दही बड़ा, साबूदाना भी खा सकते हैं।
भगवान शंकर की पूजा अर्चना निम्नलिखित पूजा सामग्री से करनी चाहिए-सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भाँग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंच फल पंच मेवा, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, शिव व माँ पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, वस्त्राभूषण रत्न, सोना, चाँदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन आदि।
प्रातःकाल स्नान, ध्यान आदि से निवृत्त होकर व्रत रखना चाहिए। पत्र-पुष्प तथा सुंदर वस्त्रों से मंडप तैयार करके सर्वतोभद्र की वेदी पर कलश की स्थापना के साथ गौरीशंकर की स्वर्ण की और नंदी की रजत की मूर्ति रखनी चाहिए। यदि धातु की मूर्ति संभव न हो तो शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बना लेना चाहिए। कलश को जल से भरकर रोली, मौली, चावल, सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगट्टे, धतूरे, बिल्व पत्र आदि का प्रसाद शिवजी को अर्पित करके पूजा करनी चाहिए।पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तिलक एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का संकल्प इस प्रकार लें-

'ॐ श्रीगणपतिर्जयतिः विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे बौद्धावतारे आर्यावर्तैकदेशे ...(शहर का नाम)....नगरे/ग्रामे, शिशिर ऋतौ, ..(संवत्सर का नाम)...नाम्नि संवत्सरे, फाल्गुन मासे, कृष्ण पक्षे, चतुर्दशी तिथौ, ..(वार का नाम)...वासरे, ..(गोत्र का नाम)...गोत्रीय ., ..(आपका नाम)...अहम्, ..(प्रातः/मध्याह्न/सायाह्न)...काले अद्य ममाखिल-पापक्षयपूर्वक-सकलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये।'

शिवजी को चन्दन का तिलक लगाने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय लं पृथिव्यात्मकं गंधं समर्पयामि।'

शिवजी को फूल अर्पित करने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय हं आकाशात्मकं पुष्पम् समर्पयामि।'

शिवजी को धूप दिखाने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय यं वाय्वात्मकं धूपम् आघ्रापयामि।'

शिवजी को दीप दिखाने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय रं वह्न्यात्मकं दीपम् दर्शयामि।'

शिवजी को नैवेद्य अर्पित करने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय वं अमृतात्मकं नैवेद्यं समर्पयामि।'

शिवजी को पूगीफल-पान अर्पित करने का मंत्रः
'ॐ नमः शिवाय सौं सर्वात्मकं ताम्बूलादि सर्वोपचाराणि मनसा परिकल्प्य समर्पयामि।'

शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने का मंत्रः
नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च
नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌। अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌॥
अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌। कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌॥
गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर। सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय।

महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले निम्नलिखित मंत्रों के माध्यम से मनोवांछित फल की कामना कर सकते हैं-
महिलाएं सुख-सौभाग्य के लिए भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें।
मंत्रः ऊं ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ऊं।

अखंड लक्ष्मी प्राप्ति हेतु निम्न मंत्र की दस माला का जाप करें।
मंत्रः ऊं श्रीं ऐं ऊं।

शादी में हो रही देरी दूर करने के लिए इस मंत्र के साथ शिव-शक्ति की पूजा करें।
हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्तकांता सुदुर्लभाम।।

पुत्र विवाह के लिए निम्न मंत्र का जप मूंगा की माला से पुत्र द्वारा करवाएं।
पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्भवाम्।

संपूर्ण पारिवारिक सुख-सौभाग्य हेतु निम्न मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
ऊं साम्ब सदा शिवाय नमः।।