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श्री गणेश यंत्र

श्री गणेश यंत्र के प्रयोग नये कार्यों को शुरु करने के लिए तथा उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए, कार्यों में आने वाली विघ्न बाधाओं को दूर करने के लिए, सुख, समृद्धि, धन, वैभव, श्री गणेश कृपा तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता हैं। गणेश यंत्र मानव के समस्त कार्यों को सिद्ध करता है। इस यंत्र साधना द्वारा मानव को गणेश भगवान की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और मानव पूर्ण लाभान्वित होता है। यह यंत्र चल एवं अचल दोनों तरह से प्रतिष्ठित किया जाता है। गणेश यंत्र को शुक्ल पक्ष की चतुर्थी ति‍थि को शुभ मुहूर्त में शास्त्रोक्त विधान से ताम्रपत्र पर निर्माण करा लें। यंत्र को खुदवाना नि‍षेध है। यंत्र साथ कुम्हार के चाक की मृण्मय गणेश प्रतिमा, जो उसी दिन बनाई गई हो, स्थापित करें। श्री गणेश यंत्र अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री गणेश यंत्र को गुरुवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए अथवा यंत्र को गुरुवार के दिन ही अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। श्री गणेश यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार श्री गणेश मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने श्री गणेश यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, भगवान गणेश से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें।
मंत्र है- ॐ गं गणपतये नम:
प्रतिदिन 31 माला का जाप यंत्र एवं प्रतिमा का पंचोपचार पीतद्रव्यों से पूजन करके 31 दिन तक करना चाहिए। एक यंत्र और एक प्रतिमा एक ही कार्य के निमित्त एक ही प्रयुक्त होते हैं। बाद में उन्हें किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।