होम/मंत्र-यंत्र संग्रह/श्री हनुमान जी के मंत्र

हनुमानजी का पूजन करते समय सबसे पहले कंबल या ऊन के आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। इसके पश्चात हाथ में चावल व फूल लें व इस मंत्र से हनुमानजी का ध्यान करें -

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
ऊँ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।।


इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री हनुमानजी का आवाह्न करें।

उद्यत्कोट्यर्कसंकाशं जगत्प्रक्षोभकारकम्। श्रीरामड्घ्रिध्याननिष्ठं सुग्रीवप्रमुखार्चितम्।।
विन्नासयन्तं नादेन राक्षसान् मारुतिं भजेत्। ऊँ हनुमते नम: आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।।


हनुमानजी की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-(आसन के लिए कमल अथवा गुलाब का फूल अर्पित करें अथवा चावल या पत्ते आदि का भी उपयोग हो सकता है)

नवरत्नमयं दिव्यं चतुरस्त्रमनुत्तमम् | सौवर्णमासनं तुभ्यं कल्पये कपिनायक ||

हनुमानजी की पूजा में इस मंत्र के साथ धूप-दीप दिखाएं

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्।।
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने। त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोस्तु ते।। ऊँ हनुमते नम:, दीपं दर्शयामि।।


हनुमानजी की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उनसे क्षमा-प्रार्थना करना चाहिए-

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं कपीश्वर | यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे ||

इसके बाद एक थाली में कर्पूर एवं घी का दीपक जलाकर हनुमानजी की आरती करें।