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भगवान श्रीकृष्ण के मूलमंत्र का जाप अपना सुख चाहने वाले मनुष्य को प्रातःकाल 108 बार करना चाहिए।

मूलमंत्र - कृं कृष्णाय नमः

सप्तदशाक्षर श्रीकृष्णमहामन्त्र का पांच लाख जाप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है

सप्तदशाक्षर श्रीकृष्णमहामन्त्र - ऊ श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा ।

सात अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र का जो जाप करता है उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

सात अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र - गोवल्लभाय स्वाहा |

आठ अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र का जो जाप करता है उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

आठ अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र - गोकुल नाथाय नमः ।

दशाक्षर श्रीकृष्ण मन्त्र का जो जाप करता है उसे संपूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति होती है-

दशाक्षर श्रीकृष्ण मन्त्र - क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः |

द्वादशाक्षर श्रीकृष्ण मन्त्र का जो भी साधक जाप करता है, उसे सबकुछ प्राप्त हो जाता है।

द्वादशाक्षर श्रीकृष्ण मन्त्र- ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय

जो भी बाईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र का जाप करता है उसे वागीशत्व की प्राप्ति होती है

बाईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र- ऐं क्लीं कृष्णाय ह्रीं गोविंदाय श्रीं गोपीजनवल्लभाय स्वाहा ह्‌सों

जो तेईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र का जाप करता है उसकी सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं

तेईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीकृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय श्रीं श्रीं श्री

जो भी अट्ठाईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मंत्र का जाप करता है उसको समस्त अभिष्ट वस्तुएं प्राप्त होती हैं

अट्ठाईस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र - ॐ नमो भगवते नन्दपुत्राय आनन्दवपुषे गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

जो भी साधक उन्तीस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र का एक लाख जप और घी, शकर तथा शहद में तिल व अक्षत को मिलाकर होम करते हैं, उन्हें स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है

उन्तीस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र - लीलादंड गोपीजनसंसक्तदोर्दण्ड बालरूप मेघश्याम भगवन विष्णो स्वाहा

जो भी साधक तैंतीस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र का जाप करता है उसे समस्त प्रकार की विद्याएं प्राप्त होती हैं

तैंतीस अक्षरों वाला श्रीकृष्ण मन्त्र-ॐ कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण सर्वज्ञ त्वं प्रसीद मे। रमारमण विद्येश विद्यामाशु प्रयच्छ मे॥