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महालक्ष्मी यंत्र

महालक्ष्मी यंत्र साक्षात देवी लक्ष्मी का ही रूप है। महालक्ष्मी यंत्र की ध्यान आराधना से मनुष्य की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से अनुकूल होकर उसको रोजगार / व्यापार में चारों और से सुखद समाचार और धन सम्रद्धि की प्राप्ति शुरू हो जाती है। सभी यंत्रों में श्रेष्ठ स्थान पाने के कारण इसे यंत्रराज भी कहते हैं। यह यंत्र स्वर्ण, चांदी तथा तांबे के अतिरिक्त स्फटिक एवं पारे के भी होते हैं। सबसे अच्छा यंत्र स्फटिक का कहा जाता है। महालक्ष्मी यंत्र की पूजा में लक्ष्मी जी का मंत्र अवश्य पढ़ना चाहिए। महालक्ष्मी मंत्र जाप के लिए कमलगट्टे की माला या मूंगे की माला का उपयोग करना उत्तम होता है। इस यंत्र को पूजा स्थान की दीवार पर धन त्रयोदशी के दिन सिंदूर, घी और चमेली के तेल से बनाकर लक्ष्मी बीज मंत्र का जाप करने से नए कार्य की योजना से धन वृद्धि होती है। इसे स्वर्ण में भी धारण कर सकते हैं।

बीज मन्त्र ---ॐ हीं महालक्ष्मये नमः ।।