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महामृत्युंजय यंत्र

महामृत्युंजय यंत्र मानव जीवन के लिए अभेद्य कवच है। बीमारी में अथवा दुर्घटना आदि से अकाल मृत्यु के भय को यह यंत्र नष्ट करता है। यह शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा को नष्ट करता है। सावन के पवित्र मास में इस यंत्र की पूजा करने के विशेष फल मिलता है। शिवार्चन स्तुति के अनुसार पंचकोण षटकोण अष्टदल व भूपुर से युक्त मूल मन्त्र के बीच सुशोभित महामृत्युंजय यंत्र होता है। आसन्न रोगों की निवृत्ति के लिये एवं दीर्घायु की कामना के लिये यह यंत्र प्रयोग में लाया जाता है। इस यंत्र का पूजन करने के बाद इसका चरणामृत पीने से व्यक्ति निरोग रहता है,इसका अभिषिक्त किया हुआ जल घर में छिडकने से परिवार में सभी स्वस्थ रहते हैं,घर पर रोग व ऊपरी हवाओं का आक्रमण नहीं होता है।
महामृत्युंजय का वेदोक्त मंत्र निम्नलिखित है-

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌ ॥

इस यंत्र को किसी शुभ समय पर या ग्रहण काल में भोजपत्र के ऊपर रक्त चंदन की स्याही तथा बेल की लेखनी से लिखकर धूप-दीप करके धारण कर लें तो समस्त रोगों का नाश हो जाता है और कुटुम्ब में भी सुख-शांति रहती है।