होम/मंत्र-यंत्र संग्रह/नवग्रह यंत्र

नवग्रह यंत्र

नवग्रह यंत्र ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों का शमन और अनुकूल प्रभावों की वृध्दि करता है। नवग्रह प्रतिकूल होने पर प्रत्येक कार्य में असफलता नजर आती है। ऐसी स्थिति में नवग्रह यंत्र को चल या अचल प्रतिष्ठा करके धारण करने से अथवा पूजन करने से नवग्रहों का शीघ्र ही अनुकूल फल प्राप्त होने लगता है। नवग्रह यंत्र को अपने पूजा घर में स्थापित कर 172 दिनों तक पूजा आपको करनी है। यदि आप सामर्थवान हैं तो एक दीपक सोने का गेहूं के दानों की ढेरी पर स्थापित करें, दूसरा चांदी का दीपक चावल की ढेरी पर स्थापित करें। तीसरा तांबे का दीपक मलका-मसूर की दाल की ढेरी पर स्थापित करें। चौथा कांसे का दीपक, चने की दाल की ढेरी पर स्थापित करें। पांचवा लोहे का दीपक काले उड़द की ढेरी पर स्थापित करें। चांदी और सोने के दीपक में गोघृत का प्रयोग करें। तांबे और कांसे के दीपक में तिल का तेल एवं लोहे के दीपक में सरसों का तेल प्रयोग करें। दीपक प्रज्वलित करने के बाद श्रध्दापूर्वक धूप जला करके पुष्प अर्पित करें। लाल पुष्प, पीले पुष्प जो भी आपकी श्रध्दा हो। पुष्प अर्पित करने के बाद कम्बल का आसन बिछा दें और वहीं बैठ कर नवग्रह स्तोत्र का पांच पाठ करें। तत्पश्चात एक माला गायत्री, एक माला महामृत्युंजय और एक माला ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप करें। ऐसा नियमित प्रात: और सायं 172 दिनों तक करें। यह प्रयोग करने से आपके जीवन में खुशहाली आएगी, आपके कार्य बनने लगेंगे।

नवग्रह बीज मंत्र

सूर्य - ॐ ह्रीं ह्रौं सूर्याय नमः
मंत्र संख्या – 7500

चन्द्र - ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः
मंत्र संख्या – 19000

मंगल - ॐ हूँ श्रीं भौमाय नमः
मंत्र संख्या – 10500

बुध - ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नमः
मंत्र संख्या -21000

गुरु - ॐ ह्रीं क्लीं हूँ बृहस्पतये नमः
मंत्र संख्या – 24000

शुक्र - ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः
मंत्र संख्या – 26000

शनि - ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः
मंत्र संख्या – 15000

राहु - ॐ ऐं ह्रीं राहवे नमः
मंत्र संख्या – 15000

केतु - ॐ ह्रीं ऐं केतवे नमः
मंत्र संख्या – 15000