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गौरी शंकर रुद्राक्ष

गौरी शंकर रुद्राक्ष शिव पार्वती का स्वरूप है। यह शिव और शक्ति का मिश्रित स्वरूप माना जाता है। प्राकृतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रुद्राक्षों को गौरी -शंकर रुद्राक्ष कहा जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से अपने सभी उद्यमों में सफलता प्राप्त होती है। यह आर्थिक दृष्टि से विशेष सफलता दिलाता है। पारिवारिक सामंजस्य, आकर्षण, मंगलकामनाओं की सिद्धी में सहायक है। गले में धारण करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। यौन समस्याओं को दूर करने में यह बहुत फ़ायदेमंद होता है तथा मानसिक शांति प्रदान करता है। यह त्वचा के रोग को दूर करने में सहायक होता है तथा पौरूष शक्ति को बढा़ने में लाभदायक है। पंद्रह मुखी रुद्राक्ष को सोमवार के दिन लाल धागे में पिरोकर ‘ॐ पशुपतय नम:’ का मंत्र जाप करते हुए धारण करना चाहिए।