होम/मंत्र-यंत्र संग्रह/श्री सरस्वती यंत्र

श्री सरस्वती यंत्र

श्री सरस्वती यंत्र का प्रयोग शिक्षा से संबंधित शुभ फल प्राप्त करने के लिए, ज्ञान, विद्या, कला, संगीत, गायन, वाणी कौशल तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। यदि आप संगीत, नृत्य तथा कला के विविध क्षेत्रों में भी अपना करियर बनाना चाहते हैं तो सरस्वती यंत्र आपके लिए लाभप्रद है। इस यंत्र की चल प्रतिष्ठा उचित है। सरस्वती यंत्र बनाने का सबसे श्रेष्ठ दिन वसंत पंचमी होता है। सरस्वती यंत्र को भोजपत्र पर अनार की कलम से अष्टगंध की स्याही से लिखें। स्याही के लिए गंगाजल का प्रयोग करें। यंत्र की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके इसे अपने अघ्ययन कक्ष में रखने से आत्मविश्वास बढ़ेगा व स्मरण शक्ति में वृद्धि होगी। यंत्र धारण करते समय गुरू मंत्र- ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम: का 11 बार जप करें। सरस्वती स्तोत्र या सरस्वती चालीसा का गुरूवार को पाठ करें। इस यंत्र का प्रभाव 4 वर्ष 4 माह तक ही रहता है इसलिए निश्चित समय अंतराल पर इसे बदलते रहें।