होम/मंत्र-यंत्र संग्रह/श्री शनि देव के मंत्र

भगवान शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उनका आवाह्न करना चाहिए-

नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |
चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी ||


इस मंत्र का जाप करते हुए भगवान शनिदेव को अर्घ्य समर्पण करना चाहिए-

ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर | अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए श्री शनिदेव को दीप अर्पण करना चाहिए-

साज्यं च वर्तिसन्युक्तं वह्निना योजितं मया | दीपं गृहाण देवेशं त्रेलोक्य तिमिरा पहम्. भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान शनिदेव को यज्ञोपवित समर्पण करना चाहिए-

परमेश्वरः नर्वाभस्तन्तु भिर्युक्तं त्रिगुनं देवता मयम् | उप वीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को पुष्पमाला अर्पित करना चाहिए-

नील कमल सुगन्धीनि माल्यादीनि वै प्रभो | मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान शनि देव को वस्त्र समर्पण करना चाहिए-

शनिदेवः शीतवातोष्ण संत्राणं लज्जायां रक्षणं परम् | देवलंकारणम् वस्त्र भत: शान्ति प्रयच्छ में ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान शनि देव जी को सरसों के तेल से स्नान कराना चाहिए-

भो शनिदेवः सरसों तैल वासित स्निगधता | हेतु तुभ्यं-प्रतिगृहयन्ताम् ||

इस मंत्र से श्री शनिदेव को जल अर्पण करना चाहिए--

ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धदिभिर्युतम् | अनिष्ट हर्त्ता गृहाणेदं भगवन शनि देवताः ||

इस मंत्र के द्वारा श्री शनिदेव को आसन समर्पण करना चाहिए--

ॐ विचित्र रत्न खचित दिव्यास्तरण संयुक्तम् | स्वर्ण सिंहासन चारू गृहीष्व शनिदेव पूजितः ||