Home/Vastu And Fengshui/ऑफिस के लिए वास्तु नियम

ऑफिस के लिए वास्तु नियम

कभी-कभी भले ही कारखाना/फैक्ट्री अच्छी तरह से काम कर रहा हो, फिर भी हम यह महसूस करते है कि व्यापार आसानी से नही चलना है एवं व्यापार को चलाने में अनावश्यक खर्च आ रहा है। इसका कारण कार्यालय(ऑफिस) की गलत स्थिति में स्थापना हो सकता है। हम ऑफिस से ही अपने सभी प्रकार की व्यापारिक गतिविधियों का संचालन करते है। भले उत्पादन एंव भण्डारण का कार्य कहीं हो रहा हो। ऑफिस मे वास्तु नियमों का ठीक प्रकार से अनुपालन नहीं करने पर कर्मचारियों के साथ अनावश्यक विवाद, महत्वपूर्ण लेन देन हेना एवं नकदी की कमी हो सकती है। वास्तव में वास्तुशास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो हमें अपने घर एवं व्यापार क्षेत्र में चीजों को सही ढंग से रखने सम्बन्धी कुछ बुनियादी दिशा निर्देशों को बताता है।वास्तु नियमों में यह प्रतिपादित किया गया है। घर या कार्यालय में कमरों की स्थिति उसकी आवश्यकता अनुसार कहां होनी चाहिए एवं फर्नीचर इत्यादि बुनियादी वस्तुओं को किसी प्रकार रखने से घर एवं व्यापार क्षेत्र में अधिकतम सकरात्मक ऊर्जा प्रवेश हो सके जिससे व्यापार वृद्धि हो।

ऑफिस के लिए वास्तुशास्त्र द्वारा प्रतिपादित कुछ नियम निम्नलिखित है :

• ऑफिस हमेंशा किसी सार्वजनिक स्थान जहां भीड़ भाड़ होना चाहिए न कि किसी निर्जन स्थान पर। शहर के भीड़-भाड़ एवं शोर शराबे घिरे हुए ऑफिस के बहुत भाग्यशाली माना जाता है। एक ऑफिस जो चारो तरफ सड़को से घिरा हुआ, वाणिज्यिक उद्देंश्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंक वास्तु में यह माना जाता है कि ऐसे में ऑफिस में व्यवसाय सभी दिशाओं से आयेगा।
• ऑफिस जहां स्थित है ऐसे प्लॉट का आकार अनियमित एवं बेढ़गा नही होना चाहिए। वर्गाकार एवं आयताकार प्लॉट ऑफिस के भवने के लिए अच्छी मानी जाती है। सिंहमुखी अथवा शेर के आकार का प्लॉट(इस तरह के भूखण्ड के सामने का हिस्सा चौड़ा एवं पिछला हिस्सा कम चौड़ा) ऑफिस के निर्माण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
• ऑफिस की बिल्डिंग का मुख उत्तर, उत्तर-पश्चिम अथवा उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर होना समृद्धि को लाने वाला माना जाता है। उत्तर दिशा सर्वश्रेष्ठ है क्येंकि वास्तुशास्त्र के अनुसार यह दिशा धन के देवता कुबेर का निवास स्थान है।
• ऑफिस के केन्द्र का हिस्सा(ठीक बीचों-बीच खाली स्थान अथवा ब्रह्म स्थान) हमेशा खाली रखा जाता है क्योंकि वास्तुशास्त्र के अनुसार यह ब्रह्मा का स्थान है एंव आकाश तत्व का प्रतीक है अर्थात् इसके स्वच्छ एवं सुन्दर होने से व्यापार में द्वैवीय कृपा बनी रहेगी। इसीलिए इस क्षेत्र को खम्भे, जल स्त्रोत एवं गंदगी इत्यादि से मुक्त होना चाहिए।
• ऑफिस के मालिक का कार्यालय उत्तर या पूर्व होना चाहिए क्योंकि इस स्थान में सकारात्मक ऊर्जा संकेन्द्रण सबसे अधिक होता है जिससे व्यवसाय का मालिक व्यापार में अधिक सक्रियता से भाग ले सकता है। साथ ही यह दिशा भगवान कुबेर का स्थान है अतः इनकी कृपा से व्यवसाय की मालिक की उन्नति हो सकती है।
• सभी प्रकार के इलेक्ट्रानिक, गैजेट, फाइलस एवं फोल्डर को अपने उत्तर मुखी ऑफिस टेबेल के बॉयी ओर रखा जाना चाहिए। यदि आप का ऑफिस पूर्वमुखी है तब सभी चीजों को ऑफिस टेबेल के दायी ओर रखा जाना चाहिए।
• ऑफिस डैक्स का आकार सदैव वर्गाकार अथवा आयताकार होना चाहिए। अंग्रेजी अक्षर स् के आकार अथवा परवलयाकार की टेबेल को ऑफिस न रखे क्योंकि यह अनिश्चिता का वातावरण का सृजन करती है। एवं सम्बन्धों में भ्रम पैदा करती है। हमेशा यह ध्यान रखे कि टेबेल के कोने धारदार नहीं हेना चाहिए। लकड़ी का टेबल ऑफिस के सबसे उत्तम माना जाता है।
• ऑफिस की टेबल पर देवी-देवताओं की तस्वीरे अथवा मूर्ति को कभी नहीं रखा जाना चाहिए। क्योंक इनसे उनका अनादर होता है। यदि आवश्यक हे तो कार्यालय के उत्तर-पूर्व कोने इन देवी-देवताओं की तस्वीरों एवं प्रतिमाओं को रखा जाना चाहिए।
• ऑफिस की टेबल पर कभी भी खाना नही खाना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार ऑफिस में ध्रूमपान अथवा शराब के सेवन से व्यापार में रूकावट आती है।
• ऑफिस की टेबल का प्रयोग ऑफिस सम्बन्धी कार्यो के लिखा-पढ़ी के लिए ही करना चाहिए न कि अन्य प्रकार के अध्ययन के लिए। इसमें धार्मिक पुस्तको का पाठ भी सम्मिलित है। ऑफिस के टेबल पर कभी होना चाहिए।
• ऑफिस की टेबल को हमेशा साफ-सुथरा एवं बेदाग रखे क्योंकि वास्तुशास्त्र का यह मानना है कि धन की देवी महालक्ष्मी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश नहीं करती जहां अत्यधिक गन्दगी एवं चीजें बेढ़गी रूप से रखी गयी।
• ऑफिस में कार्य से सम्बन्धित फाइले पश्चिम दिशा रखी जानी एवं अत्यधिक महत्वपूर्ण फाइलो को जो कि अत्यन्त संवदेनशील मामलो ंजैसे कोट केश आदि से संबंधित है उन्हे उत्तर पूर्व रखा जाना चाहिए। ऑफिस में सभी फाइलो को अलमारी में रखा जाना चाहिए और इन अलमारियों का दरवाजा हमेशा बन्द होना चाहिए
• बैंक से संबंधित सभी कागजात दक्षिण-पूर्ण दिशा की ओर रखा जाना चाहिएएवं उनपर कुमकुम या केशर का तिलक लगाना चाहिए।
• ऑफिस का कैशलॉकर एवं तिजोरी को हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर स्थापित किया जाना चाहिए जिसका मुख उत्तरदिश की ओर होना चाहिए। क्योकि वास्तुशास्त्र का यह मानना यह व्यापर में स्थिरता लाता है। तिजोरी को अत्यधिक भारी होना चाहिए एवं लोहे या स्टील धातु बना होना चाहिए।
• वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। जिसकी प्रकृति स्थिरता होती है अतः इस दिशा में भारी तिजोरी रखने से आपके व्यापार में स्थिरता आयेगी एवं आपको नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा।
• ऑफिस के मालिक को ऑफिस के दक्षिण-पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए अतः मालिक ऑफिस की सभी गतिविध्यि पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने सक्षम होगा। यह महत्वपूर्ण है कि कार्यालय में बैठते समय ऑफिस के मिलक का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
• ऑफिस के मलिक के कुर्सी के पीछे कोई दरवाजा या खिड़की नहीं होना चाहिए।
• ऑफिस के मालिक के कुर्सी के पीछे कभी भी कांच से निर्मित कोई संरचना नहीं होना चाहिए। हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास करे मालिक के कुसी के पीछे ठोस दीवार होनी चाहिए। क्योंकि वास्तुशास्त्र मेंं मजबूत दीवार मजबूत समर्थन का प्रतीक है।
• ऑफिस के रिसेप्शन(आगन्तुक कक्ष) में व्यवसाय संबंधी सभी जानकारियों को दक्षिण की दीवार पर लगाया जाना चाहिए। रिशेप्शन टेबल प्रवेश द्वार के सामने विकर्णरूप से होना चाहिए। सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ताजे फूलो का रिसेप्शन टेबल पर रखा जानी चाहिए ऑफिस के रिसेप्शन के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में एक एक्वीरियम(मछलीघर) रखना बहुत फायदेमन्द होता है।
• ऑफिस के उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर सफेद रंग के घोड़े का चित्र, पोस्टर, अथवा मूर्ति रखने से व्यापार को सभी दिशाओं से समर्थन प्राप्त होता है।
ऑफिस में इन सभी वास्त ुनियमों का पालन करने से व्यापार में वृद्धि एंव धन आगमन सुनिश्चित हे सकता है।

Vastu for Office








vastu