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मिट्टी की परीक्षा एवं भूमि परीक्षण के लिए वास्तु नियम

वास्तुशास्त्र के अनुसार, किसी भूमिखण्ड की मिटटी का प्रकार भवन निर्माण, लागत एवं नींव की मजबूती पर बहुत अधिक प्रभाव डालती है। कुछ मिटिटयां नियमित एवं साधारण प्रकार की नींव को सम्भालनें में सक्षम होती है जबकि कुछ मिटिटयों को भवन की मजबूती के अनुसार सम्भालने लायक बनाने के लिए उसमें कुछ सुधार करना पड़ता है।

मिट्टी के परीक्षण के लिए वास्तुनियमों के पीछे विज्ञान समाहित है जो भूमि के चयन एवं सही मिट्टी की पहचान के लिए दिशा निर्देशों को पारिभाषित करता है एवं भवन निर्माण के लिए आदर्श मिट्टी के प्रकारों के बारें में जानकारी प्रदान करता है। यह ध्यान रखे कि वास्तुशास्त्र में सभी नियमों को उचित तर्क एवं विज्ञान के आधार पर पारिभाषित किया गया है।

मिट्टियों के प्रकार एवं भवन निर्माण में उनकी उपयोगिता के बारे में वास्तुनियम

1. खेती योग्य भूमि

जब भी आप भवन निर्माण के लिए कोई नई जमीन खरीदना चाहते हो, हमेशा खेती योग्य भूमि का चयन प्राथमिक रूप से करें। जो कि फलफूल सब्जियां सक्षम हो। वास्तुशास्त्र में कई प्रकार की मिट्टियों का वर्णन उनके रंग, स्वाद के अनुसार किया गया। आप अक्सर ईट के रंग वाले लाल, काले, पीले, हल्के लाल, सफेद, एवं गहरे भूरे रंग की मिट्टियों का रंग पाते है। खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी का रंग पीला, भूरा, ईट वाला लाल रंग, एवं हल्का गुलाबी लाल है। भवन निर्माण के लिए इन्हे बहुत अच्छा माना जाता है।

2. काले एवं चिकनी मिट्टी वाले भूमि से बचना चाहिए

आप को कभी भी भवन का निर्माण ऐसी भूमि में नही करना चाहिए जिसकी मिट्टी चिकनी अथवा काली हो क्योंकि इन मिट्टियों की प्रवृत्ति अधिक मात्रा में पानी को सोखने में है। जिससे ये नीव में नमी पैदा कर सकते है। वास्तव में इस तरह की मिट्टी आसानी से पानी को अपने से निकलने नही देते है जिससे इसका जमावड़ा नींव में अधिक होता है एवं धीरे-धीरे नींव को कमजारे बना देता है। यदि आप इस तरह की जमीन पर घर बनाना चाहते है तो जमीन के ऊपरी मिट्टी को बदलने के कोशिश करे एवं नींव को अधिक गहरा बनाये।

3. पथरीली मिट्टी से बचे

वह भूमि जहां बहुत अधिक कांटे दार पेड़ एवं बड़े-बड़े चट्टान मौजूद हो इमारत निर्माण के लिए आदर्श नही है, यह इस बात को स्पष्ट करता है कि उस भूमि के नीचे आवश्य ही कुछ चट्टाने मौजूद होगी जो इमारत को सही सन्तुलन बनाने में बाधा उत्पन्न कर सकती है इसलिए ऐसी भूमि पर भवन निर्माण करने से पूर्व जमीन पर खुदाई करके चट्टानों को काटकर एक समतल आधार का निर्माण करना अति आवश्यक है।

4. केचुओं से भरे हुए भूमि पर निर्माण से बचे

केचुए जमीन के अन्दर रहते है तथा लगातार उसकी मिट्टियों को काटते रहते है। ऐसी भूमि कुछ फसलो के लिए सर्वोत्तम है परन्तु घर निर्माण के लिए आदर्श नही है क्योंकि आपके मकान के नींव को अन्दर से खोखला कर देंगे। अतः निर्माण से पूर्व अत्यधिक मात्रा में कींटनाश्कों का प्रयोग करके भूमि को क्रिमीमुक्त बनाने प्रयास करें।

5. कब्रिस्तान की भूमि से बचे

निश्चित रूप से इस तरह भूमि कुछ न कुछ नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न करती ही है। ठीक यही नियम श्मशान भूमि पर भी लागू हेता है। अतः ऐसी भूमियों पर मकान करने से पूर्व सर्वप्रथम एक निश्चित गहराई इसकी मिट्टी को बदले एवं गृह निर्माण से पूर्व भली भाँति भूमि की पूजा इत्यादि करवा के उसे शुद्ध करे।

मिट्टी की उपयुक्तता का परीक्षण

वास्तु शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित दो प्रकार के मिट्टियों का परीक्षण करने की विधि का वर्णन किया गया है :-

गढढे को पानी से भरना

सर्वप्रथम 2 फीट लम्बा 2 फीट गहरा खोदे एवं पानी से भर दें यदि यह गढडा उस पानी को अवशोषित करने में एक घंटे से अधिक लगाता है तो उस भूमि की मिटटी इमारत बनाने के लिए अच्छी है। इसके विपरीत यदि पानी बहुत शीघ्र अवशोषित हो जाती है तो यह इस तथ्य को इंगित करती है कि मिटटी बहुत ढीली है एवं आपके घर के नीवं के नही सम्भाल पायेगी। यह पर यह ध्यान रखे कि यदि गढढे का पानी दिनो तक नही अवशोषित होता तो यह भी मिट्टी मकान बनाने के उपयुक्त नहीं है।

मिटटी के द्वारा गढढे को भरना

सर्वप्रथम 2 फीट लम्बा 2 फीट गहरा गड्ढा खोदे एवं उसे निकली हुयी पुनः मिटटी से भरे दें यदि गड्ढा भरने के बाद कुछ मिट्टी बच जाती है तो यह भूमि भवन निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ है यदि गड्ढा भरने के बाद कोई भी मिट्टी नहीं बचती है तो यह भूमि औसत साधारण मानी जाती है।य यह भूमि साधारण मकान निर्माण के लिए ठीक है। तीसरे मामल में यदि गड्ढे में उसमें निकाली गयी मिट्टी को पुनः डालने पर फिर भी गड्ढा नही भरता है तो यह भूमि बहुत खराब मानी जाती है क्येंकि प्रवृत्ति धसने वाली होती है अतः यह भवन निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं है। अपने घर की नीव डालने से पहले वास्तुशास्त्र में वर्णित इन परीक्षणो को करना अति आवश्यक है जिससे हम उस भूमि की उपयुक्तता भवन निर्माण के लिए भली भाँति जान सके। एक सर्वश्रेष्ठ भूमि यह सुनिश्चित करती है कि इमारत कई वर्षों तक अपने स्थान पर टिका रहेगा और सब प्रकार की खुशियों को लाने के लिए मार्ग प्रदान करेगा।

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