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पश्चिम मुखी घर का वास्तु

कैसे अपने पश्चिम मुखी निवास स्थान को वास्तु नियमानुसार बनायें

अध्ययनों पता चलता है कि सामान्यता अधिकांश लोग पश्चिम मुखी घर को तीसरी प्राथमिकता के रूप में स्वीकार करते है क्योंकि वास्तुशास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा घर के निर्माण के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। किन्तु आधुनिक वास्तु विशेषज्ञ इस विचार को गलत मानते है क्योंकि इस तथ्य के बारें में कोई पुख्ता सुबूत नही मिलता है। वास्तु विषेशज्ञों का यह मानना हैं कि पश्चिम मुखी घर को भी परिवारों के निवास के लिए शुभ साबित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वास्तुशास्त्र नियमों का कठोर रूप से पालन करना आवश्यक है।

वास्तुशास्त्र पश्चिम मुखी निवास स्थान के लिए क्या कहता है?

हमने कई बार लोगों से यह सुना होगा कि यदि मकान का मुख दक्षिण दिशा की ओर है तो शायद यह जीवन परेशानियों को पैदा करेगा। ठीक इसी प्रकार पश्चिम मुखी घर में निवास करने वाले व्यक्तियों के संबंध में यह कहा जाता है कि यह दिशा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यहां आपको यह जानना आवश्यक है कि वास्तुशास्त्र कभी भी यह दावा नहीं करती है कि उत्तर दिशा निवास करने के लिए उपयुक्त एवं पश्चिम मुखी घर अत्यन्त खराब है। वास्तविक तथ्य यह है कि सभी दिशायें घर के निर्माण के लिए उपयुक्त है लेकिन आवश्यक बात यह है कि घर के निर्माण में वास्तु नियमो का पालन करना अत्यन्त आवश्यक है। निम्नलिखित लेख में पश्चिम मुखी घर से संबंधित विभिन्न वास्तु नियमों एवं सुझावों का विवरण शामिल है-

पश्चिम मुखी निवास के लिए वास्तु नियम एवं सुझाव :

• वास्तुशास्त्र के अनुसार घर निर्माण के समय प्रवेश द्वार की स्थापना पर मुख्य ध्यान दिया जाना चाहिए और यह नियम केवल किसी दिशा विशेष के बारे में नहीं है
• वास्तु के अनुसार पश्चिम मुखी का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा के तीसरे, चौथे, पाँचवें अथवा छठे पदों में स्थित हो सकता है। यहां यह जानना आवश्यक है कि वास्तुशास्त्र में प्रत्येक दिशाओं को नौ पदों मे बांटा गया है। आप इसे नौ भाग भी कह सकते है। उदाहरण के लिए यदि आपका मकान पश्चिम मुखी है तथा 27 फुट चौड़ा है तो प्रत्येक पद 3-3 फुट का होगा इस प्रकार नौ से लेकर बारह, बारह से पन्द्रह, पन्द्रह से अठारह एवं अठारह से इक्कीस फुट के बीच आप अपना प्रवेश द्वार स्थापित कर सकते है।
• कई लोग पद नम्बर 1एवं2 में प्रवेश द्वार स्थापित करना पसन्द करते है, लेकिन ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब कि तीसरे, चौथे, पाँचवें अथवा छठे पदों में स्थान उपलब्ध न हो।
• वास्तुशास्त्र कहना है कि यदि कोई पश्चिम दिशा के पद संख्या 1एवं2 का प्रयोग प्रवेश द्वार के लिए करता है तो इसका परिणाम शुभ नहीं हेाता है, लेकिन हां, यह अत्यन्त अशुभ भी नहीं होता है।
• पश्चिम दिशा के पद संख्या 7,8,एवं 9 को वास्तुशास्त्र कठोर रूप से प्रतिबंधित करता है। वास्तुशास्त्र का यह मानना है इन पदों को कभी भी किसी भी हालत में घर के प्रवेश द्वार के रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए।

पश्चिम मुखी निवास में वास्तुशास्त्र के अंतर्गत क्या करना चाहिए?

• घर का प्रवेश द्वार हमेशा पश्चिम दिशा के तीसरे, चौथे, पाँचवें अथवा छठे पदों में स्थापित करना चाहिए।
• प्रवेश द्वार की स्थापना विकल्प के रूप में पहले अथवा दूसरे पद में भी की जा सकती है।
• दक्षिण एवं पश्चिम दिशा की ओर की दीवारों को उत्तर एवं पूर्वी की दिशाओं की तुलना में अधिक मोटा एवं ऊंचा होना चाहिए।
• रसोईघर को आवश्यक रूप से उत्तर पूर्वी दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए। यदि ऐसा सम्भव नहीं है तो उत्तर पश्चिम दिशा को विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
• पश्चिम मुखी घर में पूजा घर एवं बैठक कक्ष पूर्वोत्तर दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए।
• उत्तर पश्चिम, पश्चिम अथवा दक्षिण दिशा बच्चों के कमरों के लिए आदर्श स्थान है।
• उत्तर पश्चिम दिशा को पश्चिम मुखी निवास के लिए अतिथि कक्ष के रूप में श्रेष्ठ माना जाता है।
• पश्चिम मुखी घर में ब्रह्म स्थान (घर के ठीक बीच का हिस्सा) को सदैव खाली एवं साफ-सुथरा रखने का प्रयास करना चाहिए।
• पश्चिम मुखी घर में मास्टर बेडरूम दक्षिण पश्चिम दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए।
• पश्चिम मुखी घर में शौचालय को उत्तर पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए।
• उस पश्चिम मुखी प्लाट को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जिसका ढलान दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर होता है।

Vastu for West Facing House