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मुख्य प्रवेश द्वार के लिए वास्तु नियम


वास्तु शास्त्र घर के प्रवेश द्वार को अत्यन्त महत्व देता है क्योंकि यह नियंत्रित करता है कि किस प्रकार की ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करेगी। घर का प्रवेश द्वार आसानी से नकारात्मक को दूर करते हुए घर मे किसी भी सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को आसानी से बनाए रख सकता है। यदि आप वास्तु शास्त्र में विश्वास करते हैं तो आपको अपने घर के प्रवेश द्वार को स्थापित करने के सही तरीके का पता होना चाहिए क्योंकि वास्तु शास्त्र इसकी दिशा, ऊंचाई और सजावट के तथ्यों को प्रमुख स्थान देता है। नीचे दिए गए लेख में उन चीजों के विवरण शामिल हैं जो प्रवेश द्वार की स्थापना के साथ अच्छे परिणाम बनाए रखने के लिए साबित हुए हैं।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए

दिशाओं का प्रभाव: प्रवेश द्वार के लिए वास्तु:

उत्तर:
इस दुनिया के अधिकांश लोग मानते हैं कि उत्तरमुखी घर अच्छा भाग्य लाने में अधिक सक्षम हैं। प्रवेश द्वार के साथ भी यही मामला है। वास्तु शास्त्र का कहना है कि घर का मुख्य दरवाजा उत्तर दिशा की दीवार पर पूर्वोत्तर दिशा में रखा जाना चाहिए। इस सिद्धान्त के पीछे प्रमुख कारण यह है कि यह दिशा अधिक प्रकाश और सुबह के सूर्य की किरणों सहित उनके आशीर्वाद को घर के अंदर आने की अनुमति देता है। दूसरा सबसे अच्छा विचार उत्तरी दीवार की केंद्रीय स्थिति में मुख्य द्वार स्थापित करना है और इसी दीवार के पूर्वोत्तर कोने में एक खिड़की स्थापित करना है।

दक्षिण:
जो लोग अपने घर की दक्षिण दिशा की दीवार में प्रवेश द्वार को स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें प्रवेश द्वार दक्षिण पूर्व भाग में स्थापित करने की सलाह दी जाती है। वास्तु शास्त्र दक्षिणी दीवार के दक्षिण-पश्चिम कोने में दरवाजे को स्थापित करने से बचने की सलाह देता हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह कि, दक्षिण दिशा में मुख्य दरवाजे वाले घरों में उत्तरी दिशा में कम से कम एक दरवाजा निश्चित रूप से होना चाहिए।

पूर्व:
जब आपको घर की पूर्वी दीवार पर प्रवेश द्वार स्थापित करना पड़ता है तो बेहतर परिणाम के लिए उत्तर पूर्व के कोने में प्रवेश द्वार स्थापित किया जाना चाहिए।

पश्चिम:
वास्तु के अनुसार ऐसा माना जाता है कि पश्चिम की ओर की दीवार के उत्तर-पश्चिमी कोने प्रवेश द्वार की स्थापना के लिए अच्छा विकल्प है।
अगर इन जगहों पर अपना प्रवेश द्वार स्थापित करना संभव नहीं है, तो आप नीचे की छवि में उल्लिखित किसी भी हिस्से में प्रवेश द्वार स्थापित कर सकते हैं।

मेन गेट का रंग

=> घर के मुख्य दरवाजे को रंगने के लिए बेजान रंगों का उपयोग करने से बचें; ये रंग चटकीले और आकर्षक होने चाहिए।

वास्तु के अनुसार प्रवेश द्वार के लिए क्या बातें करें-

=> घर का मुख्य दरवाजा हमेशा सबसे बड़ा होना चाहिए।
=> प्रवेश द्वार के लिए बहुत अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी का उपयोग करना आवश्यक है।
=> सुनिश्चित करें कि घर के प्रवेश द्वार खोलने और बंद होने के समय अवांछनीय शोर नहीं करते हैं।
=> प्रवेश द्वार की आभा को बढ़ाने के लिए चमकदार रोशनी का उपयोग करना लाभदायक हैं।
=> प्रवेश के द्वार में एक आकर्षक नाम प्लेट लगाना कभी भी नहीं भूलना चाहिये क्योंकि वस्तु के अनुसार, यह सुख, धन और समृद्धि का स्वागत करता है।
=> प्रवेश द्वार के साथ एक दहलीज जोड़ना अच्छा है क्योंकि यह धन हानि से बचने में मदद करता है।
=> प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिये प्रयुक्त सीढ़ियाँ हमेशा विषम संख्या में होनी चाहिये और यह हमेशा जमीनी के स्तर से कुछ ऊपर होना चाहिए।
=> यदि आप कर सकते हैं, तो घर में दो मुख्य दरवाजे स्थापित करने का प्रयास करें, जो विशेष रूप से प्रवेश के लिए और बाहर निकलने के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।
=> प्रवेश द्वार की तुलना में निकास द्वार छोटा होना चाहिए।
=> प्रवेश द्वार पर टूट या पुराने दरवाज़े का उपयोग न करें। हमेशा नए दरवाजे लगाना चाहिये क्योंकि इससे सम्मान का नुकसान नहीं होगा और कठिन समय को दूर करने में मदद मिलेगी।
=> प्रवेश द्वार को मांगलिक चिह्नों से सजाया जाना चाहिये।

मुख्य प्रवेश द्वार के लिए वास्तु






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