Home/Vastu & Fengshui/सीढ़ियों के लिये वास्तु नियम

सीढ़ियों के लिए वास्तु

सीढ़ियों के लिये वास्तु नियम क्या है?

वास्तु-शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जिसका यदि इसका सही प्रकार से अनुपालन किया जाये तो यह घर में शान्तिः, समृद्धि एवं खुशियां लाने में मदद करता है। वास्तु-शास्त्र एक सरल विज्ञान है जो हमें घर की विभिन्न दिशाओं के महत्व को बताता है एवं किस दिशा में कौन सा कमरा, रसोई एवं शौचालय इत्यादि को स्थापित किया जाये, इस सम्बन्ध में नियमों को प्रतिपादित करता है। हालांकि एक पहले निर्मित घर में वास्तु -शास्त्र में प्रतिपादित सभी नियमों का लागू करना सम्भव नहीं है, फिर भी घर में समृद्धि एवं खुशियां सुनिश्चित करने के लिए मूलभूत वास्तु नियमों का पालन किया जा सकता है। सीढ़ियां प्रत्येक घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और इसीलिए वास्तु-शास्त्र में सीढ़ियों को स्थापित करने सम्बन्धित महत्वपूर्ण वास्तु नियमों को स्थापित किया गया है। वास्तु नियमों के विपरीत घर में सीढ़ी स्थापित करने से गम्भीर स्वास्थ्य एवं धन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है, अतः सीढ़ियों को स्थापित करने से पूर्व निम्नलिखित वास्तु सुझावों का पालन करने का प्रयास करें-

वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियां कहाँ स्थापित किया जाना चाहिए?

* घर के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दिशाओं में सीढ़ियों का निर्माण किया जाना चाहिए।
* घर के बाहरी सीढ़ियों का निर्माण दक्षिण-पश्चिम दिशा में पश्चिम मुखी या दक्षिण मुखी हो सकता है, उत्तर-पश्चिम दिशा में यह उत्तर मुखी एवं दक्षिण-पूर्व दिशा में यह पूर्व मुखी होना चाहिए।
* वास्तु के अनुसार सीढ़ियों में चढ़ते समय इसका चढ़ाव दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए एवं उतराव उत्तर या पूर्व की तरफ होना चाहिए। यदि ऐसा सम्भव न हो तो सीढ़ियों में मोड़ या कटाव के द्वारा ऐसा किया जा सकता है।
* सीढ़ियां हमेशा दक्षिणावर्त दिशा (घड़ी की दिशा) में होनी चाहिए।

घर में सीढ़ियों का निर्माण करते समय इन वास्तु सुझावों का पालन किया जाना चाहिए।

- सीढ़ियों के नीचे का क्षेत्र खाली नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जहां तक सम्भंव हो इसे एक स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए।
- वास्तु-शास्त्र में यह सुझाव दिया जाता है कि सीढ़ियों में पदों की संख्या हमेशा विषम होनी चाहिए अर्थात् 5,7,11,13 इत्यादि।
- सीढ़ियों को लाल एवं काले रंग से रंगने से बचे। यह हमेशा हल्के रंग का होना चाहिए।
- टूटी हुई सीढ़ियां परिवार में दुर्घटना एवं लड़ाई झगड़ा होने का संकेत देती है अतः इनकी तुरन्त मरम्मत करवायी जानी चाहिए।

घर में सीढ़ियों का निर्माण करते समय निम्नलिखित करने से बचना चाहिए।

- घर के उत्तर-पूर्वी दिशा में सीढ़ियों का निर्माण कभी न करें। यह परिवार में वित्तीय नुकसान एवं आर्थिक बोझ उत्पन्न करेगा।
- घर के बीचों-बींच खाली स्थान को ब्रहमस्थान कहा जाता है, यह साफ-सुथरा एवं सीढ़ियों से रहित होना चाहिए।
- सर्पीलाकार सीढ़ियां हालांकि घर के सौंदर्य को बढ़ाती है किन्तु वास्तु-शास्त्र के अनुसार यह शुभ नहीं है क्योंकि यह घर में अस्वास्थ्यकर वातावरण उत्पन्न करती है। इसी तरह ऐसी सीढ़ियां लगाने से बचे जो घर को चारों तरफ से घेरती हो क्योंकि यह घर में आपदाएं ला सकती है।
- अलमारी अथवा लॉकर को कभी भी सीढ़ियों के नीचे नहीं रखना चाहिए। इसी तरह, कभी भी पूजा कक्ष एवं शौचालयों का निर्माण सीढ़ियों के नीचे नहीं किया जाना चाहिए।
- कभी भी सीढ़ियों का मुहाना पूजा कक्ष या रसोई घर के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार गोलाकार सीढ़ियों का निर्माण करने से बचें।
- एक सीढ़ी जो ऊपरी मंजिल की ओर जाती है, उसे कभी भी उसे तहखाने अथवा बेंसमेन्ट तक जाने वाली सीढ़ियों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- जहां सीढ़ियां खत्म होती है उसके ठीक सामने स्थित कमरे में निवास करने से बचें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से वह व्यक्ति बीमार एवं असाध्य रोगों से पीड़ित हो जायेगा।
- घर में सीढ़ियों का निर्माण इस तरह करना चाहिए कि घर में प्रवेश करते समय सीढ़ियां दिखाई न पड़े। क्योंकि धर में प्रवेश करते समय सीढ़ियों का दिखाई देना अशुभ माना जाता है।
- सीढ़ियों के आरम्भ एवं अंत बिन्दुओं में दरवाजों का निर्माण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सीढ़ियों का निर्माण करते समय पर यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सीढ़ियां घर के उत्तर या पूर्व की दीवारों को छूते हुए न बनें।

सीढ़ियों के लिये वास्तु नियम