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शौचालय एवं बाथरूम(स्नानागार) के लिए वास्तु नियम

शौचालय एवं बाथरूम(स्नानागार) के लिए वास्तु क्या है?

वास्तु शास्त्र सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए घर में स्थित सभी वस्तुओं का उचित स्थान निर्धारण करने का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है। चूंकि घर में स्नान कक्ष और शौचालय नकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करने के प्रमुख स्रोत हैं, इसलिए हमें अपने घरों में स्नान कक्ष और शौचालय के समुचित स्थान निर्धारण के लिए अतिरिक्त सावधानी का प्रयोग करना चाहिए। वास्तु नियमों के विपरीत घर में कहीं भी स्नान कमरे और शौचालय बनाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है। इससे वित्तीय नुकसान भी हो सकता है अतः हमें अपने घरों में स्नान कक्ष और शौचालय बनाने के लिए वास्तु शास्त्र नियमों का पालन करना चाहिए।

शौचालय के लिए वास्तु नियम

शौचालय घर के उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। शौचालय बाथरूम(स्नानागार) के साथ जुड़ा हुआ है, तो यह भी केवल इस दिशा में होना चाहिए। कमोड शौचालय के पश्चिम, दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो सकता है और यह जमीन से 1-2 फुट ऊपर होना चाहिए। कमोड का सामना दक्षिण या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- शौचालय सीढ़ियों के नीचे या घर के केंद्र में नहीं बनाया जाना चाहिए और यह भी महत्वपूर्ण है कि यह घर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने नहीं होना चाहिए।

बाथरूम(स्नानागार) के लिए वास्तु नियम

- पूर्व दिशा बाथरूम के लिए सबसे उपयुक्त दिशा है क्योंकि यह सुबह सूरज की किरणों को इसमें प्रवेश करने की अनुमति देता है।

बाथरूम फिटिंग के लिए वास्तु नियम

- स्नान, वॉश बेसिन, बाथटब और नल बाथरूम में उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसके माध्यम से पूर्वोत्तर की ओर से पानी आसानी से निकल सकता है।
- वास्तु शास्त्र में रिसता हुआ पानी का नल बहुत अशुभ माना जाता है और यह आप पर अनावश्यक व्यय लाता है। इससे पैसा कभी भी आपके घर में नहीं ठहरेगा।

बाथरूम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए वास्तु नियम

- इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे- गीजर, वाशिंग मशीन बाथरूम के दक्षिण पूर्व दिशा में रखा जा सकता है।
- यदि दक्षिण-पूर्वी दिशा संभव नहीं है, तो आप बाथरूम के दक्षिण दिशा में अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रख सकते हैं।
- कृपया सुनिश्चित करें कि स्विच बोर्ड दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए।

बाथरूम में ओवरहेड टैंक के लिए वास्तु नियम

- यदि बाथरूम में एक ओवरहेड टैंक है, तो वह बाथरूम के उत्तर पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।

बाथरूम के दरवाजे के लिए वास्तु नियम

- दरवाजा बाथरूम के दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए। यह बाथरूम के पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में हो सकता है।
- यदि उत्तर-पूर्वी कोने वाला दरवाज़ा संभव नहीं है, तो दूसरा सबसे अच्छा विकल्प बाथरूम का दक्षिण-पूर्व या दक्षिण दिशा है।
- शौचालय के दरवाजे को शौचालय का प्रयोग करने के बाद हमेशा बंद कर के रखें। इससे यह आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा को फैलने नहीं देगा।

बाथरूम में खिड़कियों के लिए वास्तु नियम

- बाथरूम के अंदर उचित वेंटिलेशन(हवा निकासी की सुविधा) होना चाहिए। एक बड़ी खिड़की उत्तर दिशा में होनी चाहिए और एक छोटी खिड़की बाथरूम के पूर्व या पश्चिम दिशा में होनी चाहिए।

बाथरूम में दर्पण के लिए वास्तु नियम

- दर्पण बाथरूम के उत्तर या पूर्व की दीवारों पर लगाया जा सकता है।
- कृपया सुनिश्चित करें कि दर्पण को बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने कभी नहीं लगाना चाहिए क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम नकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत होता है और यदि दर्पण दरवाजे के ठीक सामने होगा तो इससे बाथरूम में उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा आपके घर में फैल जाएगी।

बाथरूम के लिए वास्तु अनुसार रंग

- आप बाथरूम की दीवारों के लिए किसी भी रंग का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन लाल और काले रंग से बचें। बाथरूम की दीवार के लिए सबसे अच्छा विकल्प हैं सफेद, हल्का नीला और पीत-हरा । टाइल्स भी तटस्थ रंग में होना चाहिए।

बाथरूम के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु शास्त्र नियम

- सीढ़ियों के नीचे या पूजा के कमरे या रसोई घर के सन्निकट शौचालय का निर्माण करने से बचें। यह भी महत्वपूर्ण है कि रसोई का दरवाजा कभी भी शौचालय के दरवाजे के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। यहाँ तक की बाथरूम या टॉयलेट की दीवार एवं रसोई की दीवार या पूजा के कमरे की दीवार कभी भी एक(साझा) नहीं होनी चाहिए ।
- बाथरूम साफ और स्वच्छ होना चाहिए।
- बाथरूम के फर्श को संगमरमर से न बनवाएं।
- बाथटब का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
- घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में सेप्टिक टैंक बनवाना चाहिए।
स्नानघर में एक नीली बाल्टी और मग (लोटा) को रखना बहुत लाभकारी होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस बाल्टी को हर समय स्वच्छ पानी से भरा रखना चाहिए। यह परिवारिक सद्भाव को संतुलित अवस्था में बनाए रखता है।

शौचालय के लिए वास्तु नियम