होम/वास्तु एवं फेंगसुई/शयन कक्ष के लिए वास्तु नियम

शयन कक्ष के लिए वास्तु नियम

बेडरूम के लिए वास्तु शास्त्र क्या है?

वास्तु शास्त्र सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए घर में स्थित सभी वस्तुओं का उचित स्थान निर्धारण करने का एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है। बेडरूम हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हम इस जगह में हमारे जीवन का एक तिहाई हिस्सा बिताते हैं। यदि कोई व्यक्ति वास्तु शास्त्र में वर्णित स्थान के विपरीत किसी गलत दिशा में स्थित कमरे में सोता है, तो इससे उस व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं और हर तरह की परेशानियां आती हैं। इसलिए हमारे जीवन में स्वास्थ्य, धन और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेडरूम के लिए सुनिश्चित वास्तु नियमों का उचित पालन किया जाना चाहिए।

मास्टर बेडरूम (घर के मालिक के सोने का कमरा)

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण पश्चिम (नैर्ऋत्य) दिशा मास्टर बेडरूम के लिए सबसे अच्छा है। मास्टर बेडरूम के लिए एकदम सही दिशा दक्षिण पश्चिम कोना है क्योंकि यह दिशा कामदेव एवं राहू द्वारा शासित है। दक्षिण पश्चिम दिशा पृथ्वी तत्व को इंगित करता है, जिसका तात्पर्य भारीपन, ताकत और स्थायित्व है जिससे यह दिशा घर के मुखिया के लिए आदर्श स्थान के रूप में माना जाता है। यदि घर में एक से अधिक मंजिल है तो मास्टर बेडरूम ऊपरी मंजिल के दक्षिण-पश्चिम कोने पर होना चाहिए।

विवाहित जोड़े के बेडरूम के लिए वास्तु नियम

पति-पत्नी के बीच वैवाहिक सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए विवाहित जोड़े के बेडरूम का सामना हमेशा दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिमी दिशा की ओर होना चाहिए। विवाहित जोड़े को हमेशा दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्वी दिशा में स्थित बेडरूम में सोने से बचना चाहिए।

बच्चों के बेडरूम

बच्चों के बेडरूम का आदर्श स्थान घर के पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर है। हरे रंग बच्चों के बेडरूम के लिए आदर्श है, क्योंकि यह मस्तिष्क की शक्ति, ताजगी और शांति को बढ़ाता है। बच्चों के बेडरूम में स्टडी टेबल दक्षिण दिशा में रखा जाना चाहिए जिससे पढ़ाई के दौरान बच्चे का मुख पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा की और रहे। बच्चों के बिस्तर कमरे के दक्षिण दिशा में रखा जाना चाहिए, जबकि सोते समय बच्चों के सिर में पूर्व की ओर होना चाहिए। इस के माध्यम से बच्चें उच्च बुद्धि एवं ज्ञान हासिल कर सकते हैं। बच्चों के कमरे में दरवाजे पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करना सर्वश्रेष्ठ हैं, लेकिन यह बच्चों के बिस्तर के सामने नहीं होना चाहिए।

अतिथि शयन कक्ष

अतिथि शयन कक्ष के लिए एक आदर्श स्थान घर की उत्तर-पश्चिम दिशा है। वायु का अर्थ गति है इस कोने का प्रतिनिधित्व करता है जो कि यह दर्शाता है कि जो मेहमान इस बेडरूम में शयन करेंगे वे लंबे समय के लिए घर में नहीं रहेंगे और यह दिशा अतिथि को घर पर हावी होने या हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देती है। अतिथि कमरे में बिस्तर कमरे के दक्षिण/पश्चिम दिशा में रखा जाना चाहिए। अतिथि का सिर जबकि वे सो रहे हों, दक्षिण की तरफ होना चाहिए। अतिथि शयन कक्ष में बिस्तर के ऊपर कोई बीम नहीं होना चाहिए। अतिथि कमरे की दीवारों का रंग सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी या हल्के नीले रंग का हो सकता हैं लेकिन छत सफेद होनी चाहिए।
-यहाँ अतिथि कक्ष में दरवाजा स्थापित करने के संबंध में कुछ नियम हैं -
-उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित दरवाजे का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
-उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित दरवाजे का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
-दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थापित दरवाजे का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।

मास्टर बेडरूम में वार्डरोब के लिए वास्तु नियम

- वार्डरोब बेडरूम के पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना चाहिए।
- वार्डरोब के दरवाजे बेडरूम के पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर खुलने चाहिए। एकल दरवाजा वाले वार्डरोब्स का प्रयोग करने से बचने का प्रयास करें।
- वार्डरोब बेडरूम की दीवार को नहीं छूना चाहिए। दीवार और वार्डरोब के बीच कम से कम 6 इंच की दूरी रखें।

बेडरूम में स्थित दर्पण के लिए वास्तु शास्त्र नियम

- वास्तु शास्त्र के अनुसार, दर्पण को बिस्तर के सामने नहीं रखा जाना चाहिए। दर्पण में किसी व्यक्ति के सोते समय शरीर का प्रतिबिंब पड़ना वास्तु शास्त्र में अशुभ माना जाता है। यह उस व्यक्ति में स्वास्थ्य सम्बन्धित समस्याएं ला सकता है।
- ड्रेसिंग टेबल या दर्पण को बेडरूम के पूर्वी या उत्तरी दिशा की ओर रखा जाना चाहिए। दर्पण का मुख कभी भी बेडरूम की पूर्वी दिशा की ओर नहीं होना चाहिए।

बेडरूम में अलमारी की दिशा

- अलमारी को बेडरूम के पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए।
- यदि आप अलमारी में नकदी और गहने रख रहे हैं, तो अलमारी का मुख उत्तर दिशा की ओर रखा जाना चाहिए।
- अलमारी में दर्पण लगाने से बचने की कोशिश करें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार दर्पण का इस्तेमाल बेडरूम में नहीं किया जाना चाहिए। यदि दर्पण की अति आवश्यकता है तो प्रयोग न होने की स्थिति में ढक कर रखें।

यहाँ कुछ वास्तु शास्त्र युक्तियों का वर्णन किया जा रहा है जिनका शयन कक्ष के निर्माण के समय पालन किया जाना चाहिए :-

-बेडरूम का आकार चौकोर या आयताकार होना चाहिए।
- सोते समय सिर पूर्व या दक्षिण दिशा में रखा जाना चाहिए।
-एक्वैरियम या असली पौधों को बेडरूम में नहीं रखें।
-कभी कुछ भी पलंग के नीचे नहीं रखें।
- शयन कक्ष में दरवाजे पूर्व, पश्चिम या उत्तर की ओर होना चाहिए लेकिन दक्षिण-पश्चिम की ओर में नहीं होना चाहिए।
- शयन कक्ष में बड़ी खिड़की को उत्तर या पूर्व में होना चाहिए जबकि छोटी खिड़कियों को पश्चिम की ओर होना चाहिए।
-शयन कक्ष की दीवारों के लिए आदर्श रंग गुलाबी, नीला और हरा हैं। शयन कक्ष की दीवारों के लिए चमकीले रंग का प्रयोग करने से बचें।
-टेलीविजन सेट बेडरूम में नहीं रखा जाना चाहिए।
-युद्ध, क्रूरता, उदासी, जंगली जानवरों की तस्वीरें या किसी भी एकल पक्षी की तस्वीर को शयन कक्ष में प्रदर्शित नहीं करें।
-एक शयन कक्ष में बिस्तर के ऊपर कोई बीम नहीं होना चाहिए।
-किसी भी धार्मिक सामग्री या मूर्ति को शयनकक्ष में नहीं रखा जाना चाहिए।
- अगर शयन कक्ष से संलग्न एक बाथरूम है, तो यह सुनिश्चित करें कि यह सीधे बिस्तर के सामने नहीं होना चाहिए तथा यह भी सुनिश्चित कर लें कि बाथरूम का दरवाजा सभी समय पर बंद रहे।
-पैसे और आभूषण रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक लॉकर शयन कक्ष के उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए और इसका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

Vastu for Bedroom