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लिविंग रूम या बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम के लिए वास्तु

लिविंग रूम सभी परिवारों के लिए एकजुट होने का स्थान है जहां वे दिन भर की थकान के बाद कुछ समय एक साथ बिताना पसंद करते हैं। लगभग सभी परिवारों में इस स्थान में एकत्र होकर भविष्य और कैरियर के बारे में बहुत सारी चर्चाएं की जाती हैं, इसलिए इस कक्ष को सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखना महत्वपूर्ण है जिससे कि आपके जीवन में सकारात्मकता बढ़त पा सकें। साधारण शब्दों में, एक बैठक का कमरा घर के हृदय की भांति है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस कक्ष की ओर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। वास्तु शास्त्र में ऐसे बहुत सारे नियम वर्णित हैं जिनका आपको अपने लिविंग रूम के डिजाइन और आंतरिक सज्जा के लिए पालन करना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार लिविंग रूम या ड्राइंग रूम की दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, बैठक कक्ष या ड्राइंग रूम की दिशा मुख्य रूप से घर के मुख्य-द्वार की दिशा पर निर्भर करता है अर्थात यदि मकान पूर्वानुमुखि या उत्तरानुमुखि है तो ड्राइंग रूम को पूर्वोत्तर दिशा(ईशान कोण) में होना चाहिए । यदि मकान पश्चिमानुमुखि है तो ड्राइंग रूम को उत्तर पश्चिम दिशा(वाग्यवय कोण) में होना चाहिए । यदि मकान दक्षिणानुमुखि है तो ड्राइंग रूम को दक्षिण-पूर्व दिशा(आग्नेय कोण) में होना चाहिए ।

वास्तु शास्त्र के अनुसार लिविंग रूम का सर्वश्रेष्ठ आकार

- ड्राइंग रूम का आकार वर्गाकार या आयताकार होना चाहिए न कि अंडाकार, गोलाकार या किसी भी अन्य अजीब आकार का।

लिविंग रूम या बैठक कक्ष में सजावटी वस्तुओं को रखने सम्बन्धि वास्तु शास्त्र नियम

सभी लोग बैठक कक्ष को सबसे आकर्षक ढंग के साथ सजाना पसंद करते है लेकिन इन सभी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वास्तु शास्त्र युक्तियों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

पानी का फौवारा एवं मछलीघर:

पानी के फव्वारे एवं मछलीघर के लिए सबसे अच्छा स्थान उत्तर और पूर्वी दिशा है; हालांकि, आपको हमेशा दक्षिण दिशा में इन्हें स्थापित करने से बचना चाहिए। एक छोटा, टेबल पर रखे जाने योग्य फव्वारे को स्थापित करना अधिक उपयोगी हैं जो पूरे दिन पानी के प्रवाह को बनाए रखने में सक्षम हैं। वास्तु शास्त्र सिद्धांतों के अनुसार, इसे तांबा, कांच, पत्थर, स्टेनलेस स्टील, मिट्टी या बांस से बना होना चाहिए। इसके पीछे का वैज्ञानिक तथ्य यह है कि पानी की कल-कल करने वाली नरम ध्वनि मानव चित्त को प्रसन्न करती है और यह सबसे अच्छा मनोदशा बढ़ाने वाला काम करता है। मछलीघर में मछलियों की गतिविधियों को देखना भी बच्चों के लिए सबसे ज्यादा सुखद समय बिताने के साधनों में से एक है। जल तत्व की सकारात्मक ऊर्जा परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आगंतुकों के बीच सकारात्मक बातचीत का वातावरण उत्पन्न करती है।

आतिशदान :

यदि आप एक ठंडे क्षेत्रों में रहते हैं और अपने बैठक कक्ष में एक आतिशदान स्थापित करना चाहते हैं तो दक्षिण-पूर्व अथवा उत्तर-पूर्वी दिशा चुनना अच्छा है। लेकिन कभी भी आतिशदान स्थापित करने के लिए दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व दिशाओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके पीछे कारण यह है कि दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि तत्व द्वारा नियंत्रित होता है जबकि उत्तर-पूर्व जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

बीम :

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के किसी भी रहने वाले कमरे में सर के ऊपर से गुजरने वाले बीम स्थापित करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। यह माना जाता है कि प्रक्षेपित बीम कमरे के पर्यावरण में तनाव और परेशानी जोड़ती है। यदि आप पहले से ही बीम के साथ एक कमरे का निर्माण कर चुके हैं तो इसके नकारात्मक प्रभाव को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय इस क्षेत्र को झूठी छत (फाल्स पैनल) के साथ संतुलित करना है। यह कमरे के पर्यावरण में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

दीवार के अनुसार चित्रों के चयन का वास्तु नियम :

वास्तु शास्त्र लिविंग रूम के लिए चित्रों के बारे में कुछ विशिष्ट नियमों को प्रतिपादित करता है। यदि आप इस कमरे के लिए पेंटिंग का एक नया संग्रह खरीदने के इच्छुक हैं तो इन वास्तु शास्त्र दिशानिर्देशों का पालन करना अच्छा होगा:
• लिविंग रूम की उत्तर की दीवार के लिए जल निकायों को प्रदर्शित करने वाले चित्रों को चुनना अच्छा है, क्योंकि ये चित्र इन क्षेत्रों में जल तत्वों के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं, जो कि वास्तु में धन से सम्बन्धित है। आप धन-समृद्धि को दर्शाने वाले कुछ चित्र भी यहाँ लगा सकते हैं।
• पूर्वी दीवार को उगते हुए सूरज की तस्वीर से सजाया जाना चाहिए। इस दिशा की दीवारों को फलों और फूलों की कुछ चित्रों द्वारा सजाना भी अच्छा माना जाता है।
• यदि आप लिविंग रूम में कुछ ईश्वरीय चित्रों को लगाने में रुचि रखते हैं, तो पूर्वोत्तर दिशा इनकी स्थापना के लिए सर्वोत्तम है।
• झरने की पेंटिंग, उगते सूरज का चित्र जो सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, उसे लिविंग रूम में रखा जाना चाहिए। एकल पक्षी, जंगली जानवरों के चित्र, रोते बच्चे, युद्ध आदि के दृश्यों से सम्बन्धित चित्रों को लिविंग रूम में प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए।

वास्तु के अनुसार लिविंग रूम फर्नीचर :

- फर्नीचर ड्राइंग रूम के पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखा जाना चाहिए। भारी फर्नीचर जैसे शोकेस या भारी अलमारी आदि ड्राइंग रूम के दक्षिण और पश्चिम दीवारों की और रखा जाना चाहिए।

वास्तु के अनुसार लिविंग रूम की रंग-सज्जा :

- ड्राइंग रूम की दीवारों और टाइल का रंग सफेद हल्के पीले, नीले या हरे रंग का होना चाहिए। जहाँ तक संभव हो दीवारों का रंग लाल या काले रंग का नहीं होना चाहिए।

वास्तु के अनुसार लिविंग रूम के दरवाजे की दिशा :

- ड्राइंग रूम में दरवाजा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए क्योंकि ये बहुत शुभ दिशाएं हैं और घर में धन, स्वास्थ्य और समग्र प्रगति लाने में सहायक हैं ।

वास्तु के अनुसार लिविंग रूम के खिड़कियों की दिशा :

खिड़कियों को ड्राइंग रूम के पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए क्योंकि ये दिशाएं बहुत लाभकारी हैं।

वास्तु के अनुसार लिविंग रूम में बैठने की व्यवस्था :

- ड्राइंग रूम में बैठने की व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। ड्राइंग रूम में परिवार के मुखिया को हमेशा दक्षिण-पश्चिमी कोने में बैठना चाहिए और उसका चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। मेहमान के लिए बैठने की व्यवस्था दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम कोने में होनी चाहिए और उसका चेहरा पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।

लिविंग रूम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए वास्तु:

- टेलीविजन ड्राइंग रूम के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए।
- एयर कंडीशनर और एयर कूलर ड्राइंग रूम के पश्चिम या उत्तरी दीवार की ओर रखा जाना चाहिए।
- एक्वैरियम ड्राइंग रूम के उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जाना चाहिए।
- ड्राइंग रूम में प्रकाश की व्यवस्था बहुत अच्छी होनी चाहिए क्योंकि यह सुख और भाग्य लाता है।
- पवन की झंकार(विंड चाइम्स) ड्राइंग रूम के दरवाजे पर लगाया जा सकता है।

Vastu for Living Room